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शुक्रिया राजस्थान, शुक्रिया दैनिक भास्कर

मुस्कराओ कि मै फिर जाता हूँ

इस फैले हुए काजल ने चुगली की है

हमारे लिए पहले आप

हाँ थोड़ी सी टूटन तो थी

महकने लगी हवायें

जब जब उलझी डोरों को सुलझाया हमने

धुंधलाती सुरमई यादें...

ओस मे भीगी चांदनी चुनरी ओढे चाँद मेरा

बंधे बंधे से रहना ही नियति बन जाती है