Monday, August 23, 2010

...याद आई अभी...

यादों के उलटते पन्नो में,
तुम फड.फड. करती आई अभी,

चेहरा तंज और आँखें लाल,
गुस्से से भरी, तमतमाई हुई,

हर बात में इक उलाहना थी,
हर अदा में शिकायत भरी हुई,

मैं कितना बेजा था तब भी,
तुम हर पल जायज़ थी अब सी,

वो उसको देख मेरा हँसना,
फिर तेरा हफ़्तों लड़ते रहना,

मैं कैसा भोला पागल था,
न खुद को समझा, न तुम्हे कभी,

यादों
के उलटते पन्नो में,
तुम फिर याद आई अभी...