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लोग कहेंगे घी वाली पार्टी के विधायक जी हैं

 in खुले मन से
शहरयार का एक मशहूर शेर है-
तेरे वादे को कभी झूठ नहीं समझूंगा
आज की रात भी दरवाजा खुला रखूंगा हमारे वोटरों के दरवाजे भी हमेशा खुले ही रहते हैं। वादों पर हमें बड़ा भरोसा रहा है। नेता तोड़ते रहते हैं और हम उम्मीद जोड़ते रहते हैं। अब मामला वादों से आगे चला गया है। जीते तो मुफ्त का वादा। पहले कभी गरीबी हटाओ नारा था। गरीबी तो हटी नहीं, गरीब किनारे लगते गए। अमीर और अमीर हुए, गरीब और गरीब होते चले गए। नेताओं ने लोगों को सिर्फ जेब से गरीब नहीं बनाया। उन्हें दिमागी तौर पर भी भिखारी बना दिया है। आज हालत यह है कि मुफ्त के मोबाइल सिम को लेने के लिए लोग आधी रात से लाइन में लग जाते हैं। सियासत के मैनजर जानते हैं कि अब मुफ्त के लॉलीपॉप का जमाना है। प्रबंधक चुनावों के धंधे से पहले रोजमर्रा की चीजें बेचने वाली कंपनियों में रहे होते हैं। वह जानते हैं कि इलेक्शन के कारोबार में कस्टमर यानी वोटर को क्या चाहिए ? अब देखिए न। जनता का तेल निकालने के बाद अब मुफ्त घी देने के वादे हैं। इस बार पंजाब में 25 रुपये किलो के हिसाब से हर गरीब को दो किलो घी देने का वादा एक पार्टी ने किया। मतलब, जि…

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