तन्हाई..हैप्पी वैलेन्टाइन्स डे

चादरों में लिपटी तन्हाई को
..जैसे झटक कर फेंकना चाहा
उसने बल खा के ली अंगड़ाई
..फिर मुस्कराकर कहा
हैप्पी वैलेन्टाइन्स-डे

विस्मित सा मैं, अचान पहुँच गया
..जैसे एक टाइम मशीन में
बीस साल पहले, जाड़े की कुनकुनी धूप में
..मेरे चाय के प्याले से एक सिप लेकर
जूठा किया था, प्यार बढ़ाने के लिए
फिर बोली थीं तुम
हैप्पी वैलेन्टाइन्स-डे

तीन साल बाद, काफी कुछ बदल चुका था
..हम भी और वो भी
अब कोई और था
..थ्री-व्हीलर में सटके बैठी थी वो
श को स बोलती थी
..मैं कह रहा था..कहो न कहो न
नजरें झुका के बोली..मुझे सरम आती है
..फिर बहुत झिझक के साथ
आखिर तुमने कहा था
हैप्पी वैलेन्टाइन्स-डे

पंद्रह साल पहले, यूनिवर्सिटी के पीजी ब्लॉक में,
अंग्रेजी की क्लास में
हाँ, वो तुम ही तो थीं, हल्की स्माइल
..और एक रोज़ के साथ
तुमने भी तो कहा था
..हैप्पी वैलेन्टाइन्स-डे

फिर तीन साल बाद, रेजीडेन्सी की घास पर
..हम बैठे थे और तुम थीं जींस और पिंक टॉप में
थोड़ी देर बाद, एक पुराने दरख्त से पीठ लगाकर
..तुम बोली थीं..मेरे गुलाबों के जवाब में
हैप्पी वैलेन्टाइन्स-डे

ठंडी हवा के इस झोंके ने, जैसे नींद से जगाया
सामने फिर तन्हार्ई थी, थोड़ी गुलाबी और थोड़ी सी लाल
तुनक के बोली
कौन है मेरे सिवा, जो साथ हर वक्त रहा
..लम्बी सी सांस ली मैंने और फिर मुस्कराते हुए कहा
..रीयली लव यू तन्हाई, हैप्पी वैलेन्टाइन्स-डे
वो थोड़ा शरमायी और फिर लग गई गले

Comments

  1. ज़िन्दगी की राहों में रंजो गम के मेले हैं,

    भीड़ है हजारों की फिर भी हम अकेले है.



    अच्छा लिखा है सुधीर जी.वसंत पंचमी की शुभकामनाए.

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  2. to abki apna ye valentine day tum Tanhaai ke saath bitaane waale ho........prem mein abhibhoot hokar kis ladki ko tumne ye naam diya hai.....iska khulaasaa nahi kiya.......khair mazaak ko dar kinaar kar ke kahoon to tumhaari
    kalpana ki udaan achchhi hai..........badhiya likha hai

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  3. ये नहीं कहूँगा क्या खूब लिखा हैं क्योंकि आप हर बार; हर बात खूब और सिर्फ खूब लिखते हैं | पर इस बार जो ख्वाब की सच्चाई हम सब तक पहुंची हैं उस मुहब्बत के नाम चंद पंक्तियाँ

    मेरी दास्ताँ का उरूज था तेरी नर्म पलकों की छाँव में
    मेरे साथ था तुझे जागना तेरी आँख कैसे झपक गई
    कभी हम मिले तो भी क्या मिले वही दूरियाँ वही फ़ासले
    न कभी हमारे क़दम बढ़े न कभी तुम्हारी झिझक गई
    तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी क़ामयाब न हो सकीं
    तेरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई

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  4. एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी
    ऐसा तो कम ही होता है वो भी हों तनहाई भी

    यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
    कितनी सौंधी लगती है तब मांझी की रुसवाई भी

    दो दो शक्लें दिखती हैं इस बहके से आइने में
    मेरे साथ चला आया है आपका इक सौदाई भी

    खामोशी का हासिल भी इक लंबी खामोशी है
    उनकी बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी

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  5. किसी ने कहा है
    ये इश्क नहीं आसान इतना तो समझ लीजिये एक आग का दरिया हैं और डूब के जाना हैं

    और सच ये भी है कि

    हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
    वक्त की शाख से लम्हे नहीं तोड़ा करते
    जिसकी आवाज में सिल्वट हो निगाहों में शिकन
    ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते
    शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा
    जाने वालों के लिए दिल नहीं तोड़ा करते
    लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो
    ऐसी दरिया का कभी ऱुख नहीं मोड़ा करते

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  6. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

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