Tuesday, December 17, 2013

रोली और लाली

रुई के फाहे जैसे छह नन्हे पिल्ले। दो झक सफेद और चार चितकबरे। यानी काले सफेद का मिक्स। लाली ने बच्चे दे दिए थे। कालोनी के ज्यादातर बच्चों का मालूम था कि उनके खिलौने आने वाले हैं। जीते जागते खिलौने। पिछले साल भी ऐसा ही हुआ था। सारा दिन सामने पार्क में धमाचौकड़ी मची रहती। नन्हीं रोली को जाने किसने बताया दिया था कि पिल्ले को कान पकड़ कर टांगो। अगर वो चिल्लाए तो ठीक, नहीं तो समझो कुत्ता चोर टाइप है। रोली की लीडरशिप में बच्चों ने सारे पिल्लों को जांच लिया था, कोई चोर नहीं निकला। सारे पिल्ले रोए। इस जांच पड़ताल से नाराज लाली ने एक बच्चे के हाथ में दांत मार दिए। उसे चौदह इंजेक्शन लगवाने पड़ेगे। खामियाजा नन्हे पिल्लों को भुगतना पड़ा। रोली एंड कंपनी अक्सर उन्हें दूध, बिस्कुट, ब्रेड और कभी कभी चिप्स तक दे देती थी। सब बंद हो गया। बच्चों के एक्जा़म भी करीब थे। तीन पिल्ले एक एक करके मर गए। बाकी के तीन और लाली की मायूस आंखें रोली को भीतर ही भीतर परेशान करतीं। इस बार फिर छह पिल्ले हुए हैं। गोलमटोल। लाली किसी को पास नहीं आने देती। पर करीब दस बारह दिन बाद छह नन्हे शैतान खुद ब खुद सड़क और फिर पार्क तक पहुंच गए। बच्चों की आंखे चमक रही थीं। इस बार किसी बच्चे ने नहीं जांचा कि कौन सा पिल्ला चोर है। लाली भी दूर से चुपचाप देखती। किसी को नहीं काटा। पर इस बार ठंड बहुत थी। रोली ने एक दिन देर रात बालकनी से देखा। नन्हे पिल्ले रो रहे थे। ठंड की वजह से। सब एक के ऊपर एक। उसका मन किया मम्मी से चादर मांग कर उन्हें उढ़ा दे। यह ख्वाहिश जाहिर करते ही उसे डाट पड़ गई। ठंड में कुड़ कुड़ करते बच्चों को देख रात भर सो नहीं पाई। अगले दिन संडे था। सुबह देर से उठी तो बच्चों का झुंड नीचे शोर कर रहा था। उसने नीचे झाका तो दिल धक से रह गया। सफेद वाला एक पिल्ला मर चुका था। लाली बार बार उसे सूंघ रही रही थी। बाकी के पिल्ले उसके ऊपर लेटकर मानो गरमी देकर उसे जिलाने की कोशिश कर रहे थे। रोली यह देखकर रोने लगी। मम्मी को जब पता चला तो उन्हें भी दुख हुआ। कुत्ते के बाकी पिल्लों को बचाने के लिए अब सारे बच्चे जुट चुके थे। हर बच्चा कुछ न कुछ लाया कालोनी में ही सीढ़ियों के नीचे एक पुरानी रजाई बिछाई गई। हर बच्चा फटी चादरें, रुई और खाने पीने का सामान लेकर आया और फिर लाली के पिल्लों को वहां रख दिया गया। लाली खुद वहां आ गई। बच्चों को देखकर वह दुम हिलाने लगी। बच्चों को भी समझ आ गया कि वह थैंक्यू बोल रही है और रोली मन ही मन सोच रही थी, इस बार लाली के बाकी पिल्ले जरूर जिंदा रहेंगे-