जब जब उलझी डोरों को सुलझाया हमने

जब जब उलझी डोरों को सुलझाया हमने
खुद को फिर और उलझा हुआ पाया हमने।

जिन्दगी काश इतनी आसां होती
लड़ाई सिर्फ दुश्मनों के साथ होती
दांव आते थे दुनिया भर के मुझको
कभी गैरों ने दुश्मनी तो अता की होती।

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